Karnal Voice message August 2013


15 August

Morning:

किसानों भाइयों और बहनों । आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं । किसानों भाइयों और बहनों आपने बदलती हुई जलवायु का अनुभव जरूर किया होगा।जलवायु परिवर्तन क्यों हो रहा है। इससे खेती में होने वाले जोखिम से कैसे बचा जाय और इस जोखिम को कम करके जलवायु परिवर्तन को कैसे रोका जाय। इन सभी बातों को आप तक पहुंचाने के लिए करनाल जिले के चार गांव अंजनथली, संधीर, गढीजाटान और सांवत को क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के रूप में चुना गया है। जलवायु परिवर्तन, खेती और खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम, सीकेफ्स ने यह विशेष परियोजना आरंभ की है। इस कार्यक्रम में आपकी खेती को लाभ पहुंचाने और जलवायु परिवर्तन की जोखिम को कम करने के लिए कई बातो पर ध्यान दिया जायेगा। साथ ही आपको हर दिन आपके मोबाइल पर दो संदेश भी दिये जायेंगे। आन इन आदेशों को अवश्य सुनें और अधिक जानकारी के लिए हमें 9992220655 पर फोन करें। CCAFS के इस कार्यक्रम से जुड़ने पर आपका स्वागत है।



16 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों। CCAFS द्वारा आपके लिए एक संदेश । धान में प्रायः जिंक की कमी देखी जाती है। जिंक की कमी के लक्षण खैरा रोग के रूप में रोपाई के 20-25 दिन बाद दिखाई देते हैं। धान के पौधों की बढ़वार रूक जाती है पौधों के नीचले पत्तों पर पहले पीले धब्बे बनते है जो बाद में भूरे रंग के हो जाते हैं। फसल पर जिंक की कमी के लक्षण दिखाई दे तो पांच किलोग्राम जिंक सल्फेट और ढाई किलोग्राम बूझे हुए चूने या यूरिया का अलग घोल बनाकर 300-400 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। पहला छिड़काव रोपाई के एक महीने बाद और आवश्यकता हो तो 15 दिन बाद फिर एक और छिड़काव करें। किसी भी सूक्ष्म तत्व की कमी आने पर प्रमुख तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने का भी फसल को लाभ नहीं मिलता है। आवश्यकतानुसार सभी पोषक तत्वों का सिफारिश के अनुसार उपयोग करके ही भरपूर फसल ली सकती है। CCAFS द्वारा दिये गये इस संदेश के बारे में और अधिक जानकारी के लिए 9992220655 नम्बर पर संम्पर्क करें।



16 August

Evening:

क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों या बहनों। पृथ्वी पर बढ़ती हुई गर्मी का आपको अहसास हुआ होगा। क्या आपने सोचा है कि जलवायु परिवर्तन क्यों हो रहा है। अब यह साबित हो चुका है कि वायुमंडल में कुछ गैस जिन्हें हम ग्रीन हाउस गैसेस कहते है उनकी मात्रा बढ़ रही है। यही जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण बन रही है। ग्रीन हाउस गैसों में कार्बन डाई ऑक्साइड, मिथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, हलोकार्बन गैस शामिल है। आबादी के बढ़ने के साथ ही अलग-अलग कामों के लिए कोयला, पैट्रोल, डीजल, ईंधन का उपयोग बढ़ा है। इन सबके उपयोग से जो धुआं बनता है वो ग्रीन हाउस गैसेस को बढ़ावा देता है जो कि पृथ्वी पर गर्मी बढ़ाते हैं। खेती में किन विधियों को अपनाकर हम ऊर्जा की बचत कर ग्रीन हाउस गैसेस को बढ़ने से रोक सकते है इसकी जानकारी के लिए CCAFS आपको देता रहेगा। संदेश CCAFS द्वारा जारी इन संदेशों को बराबर सुनते रहे।



17 August

Morning:

भाइयों और बहनों। धान की फसल को चार अवस्थाओं - रोपाई, फुटान, बाली निकलते समय तथा दानें भरते समय पानी की विशेष आवश्यकता पड़ती है। इन अवस्थाओं में खेत 5 सेंटीमीटर पानी अवश्य भरा रहना चाहिए। धान की खेती में सूखा-गीला प्रणाली से सिंचाई की जाती है। इस विधि से सिंचाई करने से धान की जड़ों का जमाव अच्छा होता है।खड़ी फसल में यूरिया डालने से पहले सिंचाई रोकें और कटाई से 15 दिन पहले खेत से पानी निकाल कर सिंचाई बंद कर दें। धान में फसल की अवस्थानुसार पानी देकर कम पानी में भी अच्छी पैदावार ली जा सकती है।यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया गया है।



17 August

Evening:

करनाल जिले के क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। आपने देखा होगा कि जलवायु परिवर्तन के कारण कभी कुछ प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होता है। कभी-कभी तो फसल पूरी तरह से खत्म हो जाती है। ऐसे में हमें जानना चाहिये कि इस तरह के जोखिम से कैसा बचा जाए। फसल और पशुधन बीमा ही हमें इस समस्या से छुटकारा दिला सकता है। भारत सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बीमा स्कीम जारी की है। इस स्कीम में खरीफ की फसलों में धान, मक्का, बाजरा, सोयाबीन, कपास और दलहन फसलों को शामिल किया गया है। इन फसलों का बीमा करने पर प्राकृतिक तौर आग, बाढ़, तूफान, चक्रवात, सूखा, भूस्खलन, कीड़े व बीमारियों से फसल में उपज की कमी की भरपाई की व्यवस्था है। फसल बीमा संबंधी पूरी जानकारी के आप अपने निकट के राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा, कृषि अधिकारी या अधिकृत बीमा कम्पनी के अधिकारी से सम्पर्क करें। CCAFS से प्राप्त इस संदेश के बारे में अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर फोन करें।



18 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों। धान की फसल में रोपाई के 50-60 दिन बाद बाली निकलने की अवस्था पर यूरिया देने की आवश्यकता होती है । आपके के खेत में इस समय यूरिया खाद की कितनी मात्रा लगेगी यह तय होता है फसल के पत्तों पर हरा रंग देखकर । इसका सही अंदाज लीफ कलर चार्ट पर धान की पत्ती के रंग का मिलान करके किया जा सकता है। यूरिया देने से पहले खेत से पानी निकाल दें। यूरिया देने के बाद हल्की सिंचाई करें। नीम लेपित यूरिया काम में लेने से उर्वरक नाइट्रोजन का ज्यादा उपयोग होता है। यूरिया की घुलनशील नाइट्रोजन भूमि गहरे जा सकती है या गैस बन कर हवा में उड़ सकती है। यूरिया का गलत उपयोग उसकी उपयोग क्षमता को कम कर ही देता है लेकिन जलवायु परिवर्तन में भी सहयोग देता है। अतः सही मात्रा व सही ढंग से यूरिया काम में लें। यह संदेश आपको CCAFS के द्वारा दिया गया है और अधिक जानकारी के लिए 9992220655 नम्बर पर संम्पर्क करें।



19 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों। CCAFS द्वारा, जारी संदेशों की हर रोज आप ध्यान से सून रहे होंगे। इन संदेशों को आप हमेशा सूने और लाभ उठायें। वर्षा के ऐसे मौसम में धान की फसल में जीवाणु पत्ता अंगमारी रोग यानि बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट लगने की संभावना अधिक रहती है। रोग के लक्षण धान की पत्तियों के किनारों पर दिखाई देते हैं। जो लहरदार धारियां बनाते हुए पत्ती के सिरे से चल कर पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं। पत्तियां पीली होकर सूख जाती है और बाद में रोगी पौधे मर जाते हैं। नमी वाले मौसम में पत्तियों पर जीवाणुओं की बूंदे-सी नजर आती हैं। ये बूंदे सूखने पर सख्त हो जाती हैं और इनकी पपड़ी सी बन जाती है। इस रोग के जीवाणु बीज में या जमीन में पनपते हैं। रोग से बचाव के लिए रोगग्रस्त खेत का पानी रोग रहित खेत में न जाने दें। सिफारिश की गई मात्रा से ज्यादा यूरिया न दें। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़ कर जला दें। साथ ही 10 ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लिन दवा को 200 लीटर पानी में मिला कर एक एकड़ खेत पर छिड़कें। छिड़काव मौसम साफ होने पर शाम के समय करें। 10 से 15 बाद एक बार फिर छिड़काव को दोहरायें। अधिक जानकारी के लिए हमें 9992220655 पर फोन करें।



20 August

Morning:

करनाल जिले के क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों।कभी-कभी धान की फसल में पत्तों और तनों पर गहरे भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। बाद में ये धब्बे आपस में मिलकर पूरे पत्ते पर फैल जाते हैं और पत्ता सूख जाता है। वैसे तो यह रोग बीज से पनपता है लेकिन बाद में रोग पत्तों पर आ जाने से पूरे खेत में फैलने लगता है। रोग के ल़क्षण दिखाई देते ही मैन्कोजेब 600 ग्राम 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ खेत पर छिड़के। जरूरत हो तो 15 दिन बाद फिर छिड़काव करें। यें संदेश आपको CCAFS की तरफ से मिला है। धान की खेती के बारे में और कुछ जानना चाहते हैं तो हमें 9992220655 पर फोन करें।



21 August

Morning:

करनाल जिले के किसान भाइयों और बहनों, धान के खेतों में तेला का प्रकोप भी देखने को मिलता है। इस कीड़े के बच्चे दोनों ही पौधों का रस चूसते हैं। पत्तों का रस चूसता है और पौधों का तेला पौधे के तने के नीचले भाग से रस चूसता है। तेले के प्रकोप के कारण फसल पीली होकर सूखने लगती है। खेत इस तरह से मूखता है मानो झुलस गया हो। धान में तेले की रोकथाम के लिए 250 मिलीलीटर डाइक्लोरवास 76 ई़ सी दवा को डेढ लीटर पानी में मिलायें और फिर इस घोल को 20 किलोग्राम रेत में मिला कर एक एकड़ खेत में खड़े पानी में डालें। यह जानकारी आपको CCAFS की तरफ से ही दी गई है। अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर फोन करें।



22 August

Morning:

करनाल जिले के किसान भाइयों और बहनों। आपके धान के खेत में, खास कर बासमती धान के खेतों में, बीच बीच में कुछ पौधों के पत्तों पीले पड़ रहे हैं लेकिन उनकी लम्बाई ज्यादा दिखाई दे रही है। यह एक बीमारी है जो पौधे के नीचले हिस्से से चलती है। पौधों के तनों के नीचे की गांठों से जड़े निकलती हैं रूई जैसी सफेद या गुलाबी रंग की फंफूद दिखाई देती है। जमीन की सतह पर पौधा गल कर सूख जाता है। यह धान का पदगलन या बकानी रोग है। पौधों की इस अवस्था में इस रोग से बचाव के लिये कोई दवा छिड़कना लाभप्रद नहीं है। रोगी पौधों को उखाड़ कर निकाल दें और उन्हें जला दें। ऐसा करने से रोग बीज में नहीं जायेगा। अगले साल बीजोपचार अवश्य करें। पनीरी उखाड़ने से पहले भी खेत में दवा डालना जरूरी होगा। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर संपर्क करें।



22 August

Evening:

क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों CCAFS द्वारा खेती और जलवायु परिवर्तन पर दी जा रही जानकारी आप हर दिन सुन रहे हैं। आप यह सुन चुके हैं कि हम संदेश के शुरू में ही किसान भाइयों और बहनों कह कर अपनी बात बताते हैं। भाइयों और बहनों कहने का एक खास कारण है। CCAFS की मान्यता है कि खेती और जलवायु परिवर्तन में महिलाओं की भी सक्रिय भागीदारी है। अतः आपके गांवों में चलाये जा रहे CCAFS के कार्यक्रमों में पुरूषों और महिलाओं दोनों को ही शामिल किया गया है। इस कार्यक्रम में सिर्फ किसान की ही जानकारी न बढ़े पर पूरे किसान परिवार को इस जानकारी का लाभ मिले यह सोचा गया है। इसलिए आपसे यह कहा जा रहा है कि अपने परिवार में से किसी एक महिला सदस्य का मोबाइल नम्बर भी हमारे कार्यकर्ता को बतायें जिससे उनको भी ये संदेश भेजे जा सके । आप में से जिस परिवार ने अब तक एक महिला सदस्य का मोबाइल नम्बर इस प्रोजेक्ट में नही दिया है वो शीध्र ही यह काम कर लें। आपके इसे सहयोग के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया। यदि आपको इस सम्बंध में और कोई जानकारी चाहिए तो हमें 9992220655 पर संपर्क करें।



23 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। धान में तना छेदक कीड़ा फसल की हर अवस्था में नुकसान पहुँचा सकता है। गाभे की अवस्था में तना छेदक कीट के आक्रमण से पौधों की गोभ सूख जाती है। बालियां निकलने पर आक्रमण रहा तो पूरी बाल ही सूख जायेगी उसमें दाने नहीं बनेंगे। खेत में सूखी सफेद बाल नजर आयेगीं । तना छेदक या पत्ता लपेट सूण्ड़ी से बचाब के लिए साढे सात किलोग्राम कारटाप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी जो पदान व सेनवैक्स के नाम से मिलता है या फिप्रोनिल 0.3 जी जो रिजेन्ट के नाम से मिलता है को 10 किलोग्राम सूखी रेत में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र में डालें।मौसम सूखा रहा तो हम आपको छिड़काव की दवा भी बतायेगें। आप हमसे 9992220655 नम्बर पर बात भी कर सकते हैं।



23 August

Evening:

किसान भाइयों और बहनों। अगले तीन दिनों में दिन का तापमान कुछ बह सकता है। अधिकतम तापमान जो पिछले दिनों में 33 डिग्री सेल्सियस था वो 36 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। सप्ताह के अंत में वर्षा रूक जायेगी लेकिन आसमान में हल्के बादल रहेंगे। रात्री का न्यूनतम तापमान 25-26 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। हवा में नमी भी पिछले सप्ताह के मुकाबले कम होगी। इस समय रोग ग्रस्त पौधों को उखाड़ कर उन्हें नष्ट कर दें। खेत में जब मौसम साफ हो जाय तभी कोई स्प्रे करें। यह संदेश आपको CCAFS द्वारा दिया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर फोन करें।



24 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों। आप अपने धान के खेतों पर लगातार नजर रख रहे होंगे। यदि आप को फसल के पत्तों पर आंख के आकार के धब्बे दिखाई दे तो ये ब्लाइट रोग के लक्षण हैं। इस रोग को हम बदरा रोग भी कहते है। पत्तों पर धब्बों के साथ तनों की गांठें भी भूरी-काली हो जाती है और तना टूटकर गिर जाता है। प्रभावित बालियां खाली रह जाती हैं उनमें दाना नहीं बनते या हल्के बैठते हैं। धान की पत्तियों पर बदरा रोग के लक्षण दिखते ही एक एकड़ क्षेत्र के लिए 120 ग्राम ट्राइसाक्लाजोल 75 डब्ल्यू. पी. जो बीम या सिविक नाम से बाजार में मिलता है को 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इस छिड़काव को 10-12 दिन बाद फिर दोहरायें। ये जानकारी आपको CCAFS के द्वारा दी गई है। अधिक जानकारी के लिए हमें 9992220655 पर संपर्क करें।



24 August

Evening:

करनाल जिले के क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। किसी जगह के जलवायु का सीधा संम्बध पेड़ों और जगलों से होता है। पेड़ों की पत्तियों सूरज की किरणों को रोकती है जिससे जमीन का तापमान कम रहता है। सूर्य उर्जा का लाभ लेते हुए पेड़ अपनी पत्तियों में कार्बन-डाईआक्साइड का उपयोग कर भोजन बनाते हैं और इस प्रक्रिया के दौरान वायुमंडल को आक्सीजन भी देते हैं जिसके कारण हवा में कार्बन-डाईआक्साइड का संतुलन बना रहता है। पेड़ हवा की गति और दिशा को भी नियंत्रित करते है। इन सबका प्रभाव वर्षा पर और धरती के तापमान पर होता है। पेड़ों की लकड़ी, पत्तों, फल-फलों और जड़ों के उपयोग के बारे में तो आपको जानकारी है ही घर आंगन में तो फिर क्यों नही ंहम अपने गांव में/खेत पर साधारण या फलदार वृक्ष लगाकर जलवायु परिवर्तन पर भी रोक लगायें जिससे भविष्य में हमारी खेती भी सुरक्षित रहेगी। ये मौसम है वृक्षारोपण का इसका पूरा लाभ उठायें। यह जानकारी आपको सिकेफ्स द्वारा दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए हमें 9992220655 पर फोन करें।



25 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों।फसल को खाद देने का निर्णय लेते समय हम ज्यादातर कृषि विश्वविद्यालय या कृषि विभाग द्वारा दी गई है साधारण सिफारिश पर ध्यान देते हैं। ये सिफारिश मोटेतौर पर ठीक है लेकिन आप की फसल के शत प्रतिशत सही रहे यह जरूरी नहीं है। आपकी फसल की किस्म, पैदावार का लक्ष्य, फसल की अवस्था भूमि में नमी की उपलब्धता, बुवाई या रोपाई का तरीका, खाद न देने पर उस खेत से होने वाली उपज को ध्यान में रखते हुए आपकी फसल के लिये खाद की सिफारिश की जानी चाहिए। आपको छनजतपमदज मैनेजर या छनजतपमदज एक्सपर्ट कार्यक्रम के माध्यम से आने वाली फसल में खाद की मात्रा बतायेंगे। CCAFS द्वारा दी जाने वाली उर्वरक सिफारिश के लिए हमारे कार्य आप हमारी हेल्पलाइन 9992220655 पर संपर्क करें।



25 August

Evening:

किसान भाइयों और बहनों धान की फसल को कई बीमारियां लगती है जिनके बारे में हम आपको बराबर जानकारी दे रहे हैं। आज हम आपको शीथ ब्लाइट या पर्णच्छद अंगमारी रोग के बारे में जानकारी देंगे। धान में शीथ ब्लाइट रोग के लक्षण अकसर फुटाव से गाभे की अवस्था तक दिखाई देते हैं। तने के ऊपर लिपटी पत्ती पर अनियमित आकार के मटमैले सफेद या हरे धब्बे दिखाई देते हैं जिनका किनारा भूरा या बैगनी रंग का होता है। धीरे-धीरे इन धब्बों का आकार बड़ा होता रहता है। ये रोग खेत के किनारों और जहां खरपतवार ज्यादा है वहां से बढ़ती है। रोग फसल की ऊपर की पत्तियों तक फैल जाता है। पत्तियां सूख जाती है और बालियों में दाने नहीं बनते हैं। वातावरण अधिक नमी होने पर रोग के धब्बों पर काली-भूरी फफंूद दिखाई देने लगती है।



26 August

Morning:

क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। धान के खेत में बीमारियों और कीड़ों के प्रकोप की संभावना अधिक रहती है। धान कीे फसल पर आक्रमण करने वाले कीड़ों में गंधी बग या मलंगा भी एक प्रमुख कीट हैं जो किसी किसी वर्ष आक्रमण करता है। इस कीट के शिशु व वयस्क यानी बच्चे और बड़े दोनों ही धान की बालियों में कच्चे दानों का रस चूसते हैं जिसके कारण दाना पूरा नहीं बनता । गंधी बग की रोकथाम के लिए 10 किलोग्राम मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत किसान भाइयों और बहनों यह जानकारी आपको CCAFS की तरफ से दी गई है। अधिक जानकारी के लिए हमारी हेल्प लाइन 9992220655 पर संपर्क करें।



26 August

Evening:

क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। हमने आपको धान की फसल में लगने वाले कुछ कीड़े और बिमारियों की जानकारी दी है और साथ ही उनकी रोकथाम के उपाय भी बताये हैं। दवाईयां डालने के साथ कुछ अन्य बातों पर भी हमें ध्यान देना होगा जिससे कीड़े बीमारियों का प्रकोप न हो या कम हो। सबसे पहली बात तो यही है कि रोगरोधी किस्में लगायें। बिजाई से पहले बीजोपचार करें। फिर खेत में और मेढ़ों पर खरपतवार न रहने दें। रोगग्रस्त पौधों को निकाल कर नष्ट करें। नाइट्रोजन या यूरिया अधिक मात्रा में न दें। पानी का अधिक जमाव न करें। इन सब बातों का ध्यान रखेंगे तो कीड़े बीमारियों का प्रकोप कम रहेगा । दवाईयां भी कम लगेगी। ऐसा हुआ तो हमारा पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा और उपज भी भरपूर मिलेगी। यह जानकारी आपको CCAFS द्वारा दी गई है। अधिक जानकारी के लिए हमें 9992220655 पर फोन करें।



27 August

Morning:

क्लाईमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार करनाल जिले में आज और कल आसमान में हल्के बादल तो छाये रहेंगे पर वर्षा होने की संभावना नहीं है। दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा । वातावरण में नमी 40-70 प्रतिशत के बीच रहेगी। इसके कारण दिन में उमस महसूस होगी। यदि दिन में धूप निकल आये तो आप शीथ ब्लाइट या अन्य किसी बीमारी की रोकथाम के लिए स्प्रे कर सकते हैं। स्प्रे करते समय हवा की गति व दिशा का भी ध्यान रखें। हवा की गति रहेगी 6-7 किलोमीटर प्रति घन्टा और हवा का रूख दक्षिणी-पश्चिमी रहेगा। CCAFS के इन संदेशों को प्रतिदिन सुने और खेती और जलवायु परिवर्तन की जानकारी प्राप्त करें।



27 August

Evening:

क्लाइमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। यह संदेश आपको CCAFS द्वारा सुनाया जा रहा है। आप जब अपने धान के खेतों पर जाते हैं तो कई बार फसल के पत्ते पीले दिखाई देते हैं। क्या आपने पत्तों के पीलेपन को ध्यान से देखा है। कभी पीलापन ऊपर के पत्तों पर होता है तो कभी नीचे के पत्तों पर । कभी पीलापन पत्ते की नसों के बीच धारीदार रूप में होता है। तो कभी पत्तों पर पीलापन धान में किसी रोग या पोषक तत्व की कमी से होता है। बीमारी से पीलापन आयेगा तो पीले धब्बों के ऊपर फफंद भी होगी और धब्बों पर बाहरी हिस्से पर स्पष्ट घेरे बनेंगे। पोषक तत्वों की कमी से बने पीले पन को पहचानना मुश्किल नहीं है। कौन सा तत्व पत्ते के किस भाग पर अपना प्रभाव दिखायेगा यह जानकारी रखना आवश्यक है। कल हम आपको धान की फसल पर पोटाश की कमी के लक्षण के बारे में जानकारी देगें। इन संदेशों को जरून सुनते रहे और हमें 9992220655 पर संमर्क करें।



28 August

Morning:

किसान भाइयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। आज हम आपको धान की फसल पर पोटाश की कमी के लक्षण की जानकारी दे रहे हैं।धान की फसल में पोटाश्ज्ञ की कमी के लक्षण नीचे वाली पत्तियों पर नजर आते हैं। पत्तियों के किनारे पीले पड़ जाते हैं जो बाद में पूरी पत्ती पर फैल जाते हैं बाद में ऐसा लगता है कि पत्ते झुलस गए हैं। पोटाश की कमी के लक्षण नाइट्रोजन की कमी के लक्षण से बिल्कुल उल्टे हैं। नाइट्रोजन की कमी के लक्षण ही नीचे वाले पत्तों पर ही दिखना चालू होते हैं लेकिन उनमे पत्ती के सिरे से मध्य शीरा के साथ पीलापन तिकोने रूप में बढ़ता है और पत्ते के किनारे हरे रहते हैं। हमें चाहिए कि हम पोषक तत्वों की कमी के लक्षण पहचाने। इस तरह की और जानकारी के लिए CCAFS द्वारा जानकारी संदेशों को सुनते रहें।अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर संपर्क करें।



28 August

Evening:

क्लाईमेट स्मार्ट विलेज के किसान भाइयों और बहनों। आप सबको CCAFS का नमस्कार। आप सबने यह अनुभव यिा होगा कि जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों की प्रति एकड़ उपज में कमी आई है। हमारी मुख्य फसलों-धान और गेहूं पर भी इसका प्रभाव पड़ा है। जलवायु परिवर्तन के इस तरह के प्रभाव को कम करने के लिए कई अनुसंधान संस्थान और संगठन काम कर रहे हैं। भारतीय वृदिव अनुसंधान परिषद आई सी ए आर और प्रदेशों के कृषि विश्वविद्यालय में फसलों की नई किस्में विकसित कर रहे हैं जो मौसम के बदलाव को सह सके। जलवायु परिवर्तन के उपज पर दूष्प्रभाव से बचने के लिए हमें नई किस्मों को अपनाना होगा। हम इन किस्मों के बारे में समय-समय से आने पर जानकारी देते रहेंगे। आप हमारे संदेशों की लगातार सुनते रहिये।



29 August

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। CCAFS की तरफ से हम लगातार खेती के ऐसे संदेश दे रहें है जिससे आप आपनी फसल को कीड़े बीमारियों से बचा सकें। खेती की लागत कम कर सकें और उपज भी बढ़े सकें संघीर गाँव के श्री पवन कुमार ने जिनका मोबाइल नः है 9671506272 हमें बताया है कि Sheks blight रोग से बचाव का संदेश सून कर उन्होने यह देखा कि बीमारी वाकई में उस तरफ थी जहां थी खरपतवार थें और उसके पास खेत नहीं थी जहां खरपतवार नहीं है। श्री पवनकुमार ने अपने खेत से खरपतवार हटायें । किसान भाइयों और बहनों सिर्फ दवा छिड़ककर ही बीमारी की रोकथाम करना प्रभावी नही हो सकता। जैसा कि आपके पड़ोसी किसान श्री पवन कुमार ने हमारी बातों को समझकर बीमारी न फैलने के दूसरे उपाय भी अपनाए आप भी करें और खेती में आपकी उपज पर सही मुनाफा पाये। CCAFS द्वारा जारी इस संदेश को सुनने का आप हमें 99922206855 पर सम्पर्क भी कर सकते हैं।



29 August

Evening:

किसान भाइयों और बहानों। CCAFS द्वारा प्रसारित इस संदेश में हम आपको आगामी तीन दिनों के मौसम के बरे में जानकारी दे रहे हैं। मौसम विभाग से मिली सूचना के अनुसार अगले तीन दिनों तक करलाल जिले में दिन का तापमान और बढ़ कर 38 डिग्री सेल्सियस रह सकता है लेकिन रात का न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आस.पास ही रहेगा। आसमान में हल्के बादल दिखाई दे सकते हैं लेकिन वर्षा की सम्भावना बिल्कुल नहीं है। हवा का रुख दक्षिणी पश्चिमी रहेगा। ऐसे मौसम में आप आपने खेतों से धान के बीमार पौधों को निकाल कर नष्ट करें। खासकर बकानी रोग वाले पौधों को अवश्य निकाले क्यों कि इस रोग का दवाईयों से अब रोकथाम नहीं हाय इसलिए इसे फैलने से बचायें। अधिक जानकारी के लिए हमारे हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें।



30 August

Morning:

किसान भाईयों और बहनों। कभी .कभी आपने देखा होगा कि सिफारिश के अनुसार खाद डालने पर भी पूरा खेत हल्का पीला है और धान की फसल की बढ़वार नहीं हो रही है। हम तो खाद के रुप में दो.तीन पोषक तत्व ही फसल को देते हैं लेकिन फसल को कम से कम सोलह पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। जिस तत्व की जमीन में कमी हो जाती है वही तत्व पौधों की बढ़वार रोक देता है और अपनी कमी के लक्षण पौधों पर छोड़ता है। पूरे पौधों का हल्का पीला होना अकसर सल्फर या गंधक की कमी की तरफ इशारा करता है। ऐसे खेत जिम में हम लगातार ऐसी खाद डाल रहें हैं जिनमें गंधक नहीं है जैसे यूरिया डी.ए.पी, एन.पी.के. तो वहां धीरे धीरे गंदध की कमी आती है। साथ ही वो खेत जिनका पी.एच साढ़े आठ के करीब हो वहां भी गंधक की कमी के लक्षण फसल पर देखे जा सकते हैं। गंधक की कमी दूर करने के लिए खेत तैयार करते समय प्रति एकड़ 100 /150 किलोग्राम जिप्सम या पाइराट डाल सकते हैं। अब तो बाजार में 90% वाला शुद्धता वाला सल्फर भी लिम रहा है। आप अपनी फसलों में पौषक तत्वों की कमी को पहचाने और उसी अनुसार खाद का प्रयोग करें। यह संदेश आपको CCAFS द्वारा दिया गया है



30 August

Evening:

किसान भाइयों और बहनों। बरसात के रुक जाने से और गर्मी बढ़ जाने से आपके धान के खेतों में सिंचाई की आवश्यकता ज्यादा महसूस हो रही होगी। लेकिन धान के खेत में लगातार पानी खड़ा रखने की जरुरत नहीं है बस खेत में इतनी नमी रखें कि गीला रहें। बाली निकलने के बाद खेत में एक इन्च के करीब पानी रखें। समतल खेतमें पानी के स्तर को एक सा रखाना ज्यादा सम्भव है। हल्की जमीनों में कटाई से 7.8 दिन पहले और भारी चिकनी मिट्टी वाली जमीनों में 15 दिन पहले पानी बंद कर दें। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया गया है। अधिक जानकारी के लिए हमारे हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें।



31 August

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। आपके धान के खेत अभी अलग अलग अवस्थाओं में खड़े हैं। कुछ खेतों में धान में बालियां आगई हैं कुछ अभी गाभे की अवस्था में है और कुछ खेतों में आपने हाल ही में ऊपर के पत्ते काटे हैं और वो बढ़वार की अवस्था में हैं। जो खेत अभी गाभे की अवस्था में है और वैसे खेत जिसने ऊपर के पत्ते अभी हटाये उनमें आप यूरिया का आखिरी डोज दे सकते है। यूरिया देने से पहले खेत का पानी निकाल लें। जिन खेतों में बीमारी का प्रकोप वहां यूरिया न दें। यूरिया की मात्रा एक एकड़ में 25 किलोग्राम से ज्यादा न डालें। अधिक जानकारी के लिए आप की CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें।



31 August

Evening:

क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। हमने आपको कीड़े और बिमारियों की रोकथाम के लिये सिर्फ दवाईयों पर ही निर्भर न रहने की सलाह दी थी। इसी तरह आज हम आपसे यह कह रहे है कि फसल को पोषक तत्व यानि खाद देने के लिए सिर्फ रासायनिक खादों . यूरिया डी0ए0पी0 वगैरह पर ही निर्भर न रहें। जीवांश खादों में गोबर की खाद हरी खाद केचुआ खाद जीवाणु खाद फसल अवशेष सबका मिला जुला उपयोग कर हम भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ा सकते हैं। ऐसे में फसल चक्र में दलहनी फसल को शामिल करना भी लाभकारी है। रबी की फसल के लिए आप केचुआ खाद बनाने का काम भी आप अभी शुरू कर सकते हैं। पोषक तत्वों को इस तरह देने से आप रसायनिक खाद की मात्रा और लागत कम कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए 9992220655 पर फोन करें।


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