Karnal Voice message December 2013


01 DECEMBER

Morning :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाई बहनों के लिये यह सूचना CCAFS की तरफ से दी जा रही है। गेहूँ की खड़ी फसल दीमक का प्रकोप शुरू से ही हो सकता है। दीमक पौधों की जड़ो को खाकर नुकसान पहुंचाते हैं और पौधा मर जाता है। फसल में दीमक का आक्रमण दिखाई देने पर दो लीटर क्लोरपाइरीफास 20 ई.सी. दवा को दो लीटर पानी में घोलकर 20 किलोग्राम रेत में मिलायें। इसके बाद इसे एक एकड़ गेहूँ की फसल में एक सार भूरकाव करके सिंचाई कर दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



01 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाई बहनों को CCAFS का नमस्कार। क्या आपने कभी यह सोचा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण गेहूँ की खेती पर क्या असर पड़ेगा। जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर रबी फसलो पर ही पड़ने वाला है। जैसे जैसे पृथ्वी पर गर्मी बढ रही है ठण्ड कम होने से रबी का मौसम छोटा होता जा रहा है। रबी का मौसम छोटा होने से बहुत से स्थान गेहूँ की खेती करने लायक नहीं रह जायेगा और उनकी जगह दूसरी फसले लगानी पड़ेगी जैसा कि दक्षिण भारत में होता है। जहां एक ही फसल को खरीफ में भी लेते हैं और रबी में भी लेते हैं। तो जलवायु परिवर्तन के कारण फसल प्रणाली में बदलाव आने की समभावनाएं है। गर्मी बढने से आज जो इलाके अधिक ठण्ड वाले बर्फिले हैं वहां शायद गेहूँ की खेती का मौसम बन जाए। हिमाचल प्रदेश में ऐसा ही कुछ देखने को मिला है। गेहूँ की खेती के नये क्षेत्र उभर आये हैं यदि हमें उत्तर भारत के मैदानी इलाके गेहूँ की खेती को बनाये रखना हैं तो जलवायु परिर्वतन की प्रकिया को रोकना होगा या धीमा करना होगा। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



02 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनो । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। बोने गेहूँ में पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद देनी होती है। इस अवस्था पर पौधे पर चार पत्तियां बन जाती है और शीर्ष या शिखर जड़ निकलना भी आरम्भ हो जाती है। इस समय यदि खेत में पर्याप्त रहेगी तो हर पौधे पर कल्ले अधिक फूटेगें। अधिक कल्ले मतलब अधिक बालियां यानि अधिक उपज। अतः इस अवस्था पर सिंचाई का बड़ा महत्व है। कल्ले फूटने के साथ ही पौधे का वानिस्पतिक बढवार भी होता है और पौधे में नाइट्रोजन की आवश्यकता भी बढ जाती है। अतः सिंचाई के समय नाइट्रोजन की खाद यूरिया भी देना चाहिये। पहली सिंचाई हल्की ही रखें क्योंकि इस समय पौधे की जड़े ज्यादा गहरी नही होती अतः ज्यादा पानी देने से खेत के पोषक तत्व पानी में घुलकर जड़ क्षेत्र से नीचे चले जायेगें और पौधे को उपलब्ध नहीं होगें। पहली सिंचाई में गेहूँ को दो इन्च पानी दे। दो इन्च गहराई का पानी देने से खेत एक-डेड फीट गहराई तक गीला हो जायेगा। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



02 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। हम सदियों से गेहूँ की खेती करते आ रहे हैं क्या हमने इस बात पर ध्यान दिया है कि गेहूँ की बढवार और विकास पर मौसम किस तरह असर डालता है और गेहूँ के लिये सबसे उपयुक्त जलवायु कौन सा रहता है। उत्तर भारत में गेहूँ की खेती रबी के मौसम में करते हैं। गेहूँ के सामान्य अकुंरण और आरम्भिक बढवार के लिये दिन का औसत तापमान 20-22 डिग्री सेल्सियस सबसे अच्छा रहता है। अकुंरण तो इससे ज्यादा तापमान होने पर भी हो जायगा लेकिन उसमें कल्ले नहीं फूटेगें जिससे पैदावार में कमी आयेगी। कल्लों के फुटान और बढवार के लिये दिन का औसत तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस चाहिये। उसके बाद यदि औसत तापमान 10-12 डिग्री सेल्सियस से नीचे जाता है तो बढवार रुक जाती है और यदि रात का तापमान गिर गया तो पाले की सम्भावना रहती है। पकाव के लिये दिन का औसत तापमान 23-25 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त रहता है। ऐसे में दाना ठीक बनता है। ज्यादा तापमान होने से दानो का विकास नहीं होता और दाने सुकड़ जाते हैं और फसल में पकाव जल्दी हो जाता है जिससे उपज की गुणवक्ता और मात्रा कम रहती है। हमें जलवायु परिवर्तन पर ध्यान देकर इस बदलाव को रोकना है क्योंकि जलवायु परिवर्तन से खेती पर ही सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ने वाला है। CCAFS से जारी इन संदेशों को लगातार सुनते रहियें। धन्यवाद।



03 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। साधारण तथा हमें जो खाद की सिफारिश मिलती है वो किसी खेत विशेष की न होकर एक बहुत बड़े क्षेत्र की औसत सिफारिश होती है। यह जरूरी नही कि वो आपके खेत के लिये सबसे उपयुक्त सिफारिश है । सिर्फ मिट्टी के नमूने से कि जांच से भी स्थान या खेत विशेष के लिए बिलकूल सही सिफारिश मिल जाय यह जरूरी नहीं।Site Specific Nutrient Management यानि स्थान विशेष के लिये पौध पोषक तत्व प्रबन्ध पर पिछले कुछ सालो में विशेष अनुसंधान हुआ है। इसके तहत Nutrient Expert प्रणाली का विकास हुआ है। इसमें हर खेत के लिये उस खेत की मिट्टी, फसल, पानी और उपज के ध्यान में रखते हुए वहां उपलब्ध खाद और उर्वरक की सही सिफारिश निकाली जाती है और अन्त में यह भी बताया जाता है कि Nutrient Expert की सिफारिश मानने से खाद की लागत पर मुनाफा कितना बैठेगा। जिन लोगो ने गेहूँ की बुवाई कर ली है व¨ अब भी Nutrient Expert के माध्यम से पौषक तत्वों और उर्वरकों की सिफारिश ले सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



03 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । गेहूँ में पहली सिंचाई के साथ ही खड़ी फसल में नाइट्रोजन की आवश्यकता पूरी करने के लिये खेत में यूरिया बिखेरा जायेगा। क्या आपको यह मालूम है कि जितना नाइट्र¨जन हम गेहूँ में देते हैं उसका लगभग पचास प्रतिशत यानि आधा ही पौधों द्वारा लिया जाता है बाकि आधा हवा और पानी के साथ मिलकर पौधों की पकड़ से बाहर हो जाता है। इसका मतलब यह हुआ कि हमें वास्तब में जितना यूरिया चाहिये इससे ज्यादा यूरिया बनाना पड़ता है यह विदेशों से मंगाना पड़ता है। जिसके लिये हमारे देश के संसाधन और पैसे का नुकसान होता है और किसान के स्तर पर उसके खर्च का सही इस्तेमाल नहीं होता है। यूरिया को खड़ी फसल में डालते समय कुछ छोटी छोटी बातों का ध्यान रखें तो उसके प्रभावी उपयोग को बढाया जा सकता है। सबसे पहले तो यह ध्यान रखें कि सिफारिश की गई मात्रा से ज्यादा यूरिया न डाले उससे फसल को नुकसान हो सकता है। दूसरी मुख्य बात है कि यूरिय खेत में डालने के बद धूप में खुला न पड़ा रहें। इसके लिये यदि आप सिंचाई के पहले यूरिया दे रहे तो जैसे जैसे सिंचाई जाय तो आगे यूरिया डाले और सिंचाई हल्की करें। यदि सिंचाई के बाद यूरिया दे रहे तो यूरिया डालने के बाद गुड़ाई करें या दोपहर बाद यूरिया डालें। दोपहर बाद यूरिया डालने से रात की औस के साथ यूरिया के दाने भीग कर जमीन में चलें जायेगें। ध्यान रहे सुबह डाला गया यूरिया औस से भीगें पत्ती पर न गिरे। जहां तक सम्भव हो नीम लेपित यूरिया काम में लें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



04 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। बोने गेहूँ की बुवाई के 30-35 दिन बाद यानि पहली सिंचाई के 7 से 10 दिन बाद खरपतवार निकालने का समय होता है। पहली सिंचाई के बाद खेत में खरपतवार भी निकल आते हैं और उन्हे शुरू में ही खत्म कर देना चाहिये। खेत के किनारों और नालियों पर भी खरपतवार नष्ट करें। जहां परिवार के लोग खेत में काम करते है वे खुरपी, फावड़ा, कुदाली, कसी या Wheal Hoe की मदद से खरपतवार हटा सकते हैं। ऐसा करने से खेत में एक गुड़ाई भी हो जाती है। जहां मजदूरी की समस्या है वहां रसायनिक विधि से खरपतवार नियंत्रण किया जाना चाहिये। चौड़ी और संकरी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण के लिये आज कल कुछ विशेष खरपतवार नाशी दवा बाजार में उपलब्ध है। इनमें प्रमुख हैं टोटल, एटलाटिस, एकाईप्ल्स वेस्टा, पाइट, रक्षक, जयविजय, लीडर, सफल पूमा सुपर, पूमा पावर, एक्सियल आदि। इन रसायनों की मात्रा अलग अलग हैं। उसका ध्यान रखें साथ ही फसल चक्र के हिसाब से इनका इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं उसका भी ध्यान रखें। रसायनो का छिड़काव खिली धूप वाले दिन जब हवा की गति बहुत कम हो तब करें। छिड़काव की फुव्वार दूसरी फसलो पर न जाए। रसायन के डिब्बे पर लिखी प्रयोग विधि को भी ध्यान से पढे और उसी अनुसार छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



04 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनो । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। सतही टिड्डा जिसे साधारणतया टोका भी कहते हैं। अंकुरित गेहूँ को बहुत नुकसान पहुंचाता है। यह कीट पौदों को जमीन के पास से काटता है। सतही टिड्डे की रोकथाम के लिये मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत पाउडर प्रति एकड़ के हिसाब से भुरकाव करें। आपके खेत में गेहूँ पर और कोई समस्या हो तो CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर अवश्य सम्पर्क करें। धन्यवाद।



05 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । आप सभीको CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की बुवाई के बाद खेत में सबसे पहले जिस कीट का प्रकोप फसल पर दिखाई देता है वो है दीमक। दीमक से बचाव के उपाय हम आपको बताते हैं। दूसरा कीट है सतही टिड्डा जिसे टोका भी कहते हैं यह कीट अंकुरित गेहूँ के लिये बहुत हानिकारक होता है। सतही टिड्डा पौधे को जमीन के पास से काटता है जिससे पौधा खत्म हो जाता है। सतही टिड्डे से बचाव के लिये दस किलोग्राम मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत पाउडर को एक एकड़ क्षेत्र पर एकसार बिखेरे। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



05 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। सिंचाई के लिये जो पानी खेत को दिया जाय खासकर Tube Well या कुओं से उनकी जांच करवा लेना लाभप्रद रहता है। पानी में कई घुलनशील तत्व या रसायन हो सकते हैं जिनकी वजह से भूमि की उप्तादकता और उर्वरकता पर प्रभाव आ सकता है। पानी में खरपतवार होने के कारण भूमि का पी.एच. बढ सकता है और जमीन कल्लर या ऊसर हो सकती है। सिंचाई के पानी से कुछ पोटाश तत्व की मात्रा भी खेत को मिल सकती हैं। पानी में कार्बोनेट की मात्रा होने से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्व खासकर लोहा और गंधक फसल को नहीं मिल पाते हैं इसलिये पानी की जांच भी अवश्य कराते रहना चाहिये। सभी मिट्टी परिक्षण प्रयोगशाला में पानी की जांच भी होती है। किसी साफ कांच वा प्लास्टिक बोतल में पानी का नमूना लें और प्रयोगशाला से जांच करायें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



06 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले दो-तीन दिनो में मौसम में कोई बदलाव की सम्भावना नही है। हालाकि रात में थोड़ी ठण्ड बढ सकती है। दिन का अधिकतम तापमान तापमान 25 डिग्री सेल्सियस तथा रात में न्यूनतम तापमान 11 से 9 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। मौसम शुष्क रहेगा। सुबह के समय हवा में नमी 25-35% और दोपहर में 15-20% तक रह सकती है। पिछवा हवा 4-11 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफतार से चलेगी। गेहूँ की फसल जो 20-25 दिन की हो गई है वहां पहली सिंचाई और यूरिया खाद दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



06 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। आप सब हर सुबह अपने गेहूँ के खेत पर अवश्य जाते होंगे। वहां यह ध्यान दे कि अंकुरण के बाद पौधे की स्वस्थ बढवार हो रही है या नही किसी भी तरह के कीट प्रकोप या पत्तों पर कोई लक्षण दिखने पर हमें अवश्य बताये जिससे कि आपको सही समाधान बताया जा सकें। गेहूँ की बुवाई के 25-30 दिन बाद से ही जिंक की कमी के लक्षण पत्तों पर उभर सकते हैं। जिंक की कमी होने पर बीच के पत्तों पर मटमैले भूरे-पीले धब्बे दिखाई देते हैं जो बाद में पूरे पत्तों पर फैल जाते हैं। ऐसे लक्षण रेतीली भूमि, जहां भूमि की पी.एच. 8 से ज्यादा हो या जहां पिछले दो-तीन साल में देसी खाद या जिंक सल्फेट का प्रयोग नहीं किया हो विशेष रुप से दिखाई देते हैं। खड़ी फसल में जिंक सल्फेट बिखेर कर या छिड़काव कर जिंक की कमी को दूर किया जा सकता है। 25% जिंक वाला जिंक सल्फेट 10 किलोग्राम प्रति एकड़ के हिसाब से यूरिया देने दे साथ ही खेत में बिखेरे। यदि छिड़काव करना चाहे तो पहले 2 किलोग्राम जिंक सल्फेट और 1 किलोग्राम बुझा चुने का अलग घोल बना लें फिर इसे 200 लीटर पानी में मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। धन्यवाद।



07 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों आप सबको CCAFS का नमस्कार। गेहूँ के उन खेतों में जिनका पी.एच. 7 से अधिक है भूमि में पौधों को मैगनीज तत्व की उपलब्ध कम हो जाती है। मैगनीज की कमी होने पर पत्तियों पर भूरे-पीले रंग की धारियां पत्ती के सीरे से शुरु होकर नीचे की ओर बनती है। पौधे मुझाये से दिखते हैं। ये लक्षण गेहूँ में शुरू से ही बालियां निकलने की अवस्था तक दिखाई देते हैं। पौधों की बढवार भी कम रहती है और बालियां तुड़ी-मुड़ी होकर निकलती है। मैगनीज की कमी के लक्षण दिखाई देने पर एक किलोग्राम मैगनीज सल्फेट का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें, यदि आवश्यकता हो तो यह छिड़काव 10-12 दिन के अन्दर पर फिर दोहराये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



07 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाई-बहनों के लियें यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। आज हम आपको गेहूँ में लौह यानि आयरन तत्व की कमी के लक्षण की जानकारी दे रहे हैं। लौहे की कमी के होने पर गेहूँ में कल्ले कम फुटते हैं। ज्यादा कमी होने पर कल्लों में बाली नहीं बनती है और कल्ले सूख जाते हैं। सबसे पहले नई पत्तियों में नसो के बीच का हिस्सा पीला हो जाता है लेकिन नसे हरी ही रहती है, जिसके कारण पत्तों पर हरी और पीली धारियां दिखाई देती है। अगर लौहे की ज्यादा कमी रही तो पूरी पत्ती का रंग ही पीला होकर सफेद हो जाता है। लोहे की कमी के लक्षण दिखाई देते ही फैरस सल्फेट जिसे हम हरा कसीस के नाम से भी जानते हैं का छिड़काव करना चाहिये। 200 लीटर पानी में एक किलोग्राम फैरस सल्फेट मिलाकर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। आवश्यकता हो तो 10-15 दिन बाद एक छिड़काव और करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 09992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



08 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के सभी किसान भाइयों और बहनो को CCAFS का नमस्कार। अकसर ये कहा जाता है कि हम नाइट्रोजन तत्व का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसा दो तरीके से हो सकता है । एक तो यह कि हम सिफारिश की गई मात्रा से ज्यादा नाइट्रोजन डालें। दूसरा यह कि दूसरे तत्वों के मुकाबले नाइट्रोजन ज्यादा डाले यानि इसका असन्तुलित मात्रा में उपयोग करें। दोनों ही ढंग से नाइट्रोजन का उपयोग ज्यादा माना जायेगा और पौधों पर इसका बुरा प्रभाव रहेगा। नाइट्रोजन का काम है पौधों में वानिस्पति बढवार करना। पौधों में हरा पन Chlorophyll बनाना। अगर नाइट्रोजन ज्यादा दी गई है तो पौधों का वानिस्पतिक बढवार होते रहने से वे ज्यादा देर से पकाव की अवस्था पर आयेगे, पौधों की ऊंचाई भी बढ जायेगी। हरा रहने से वो नरम भी रहेंगे। इस सबका नतीजा ये होगा कि पौधे में दानें के अनुपात में भूसा ज्यादा बनेगा। देर से पकाव की अवस्था में शायद एक सिंचाई ज्यादा देनी पड़े। फसल पर कीड़े और बिमारियां ज्यादा लग सकती है और इसके आड़े गिरने की सम्भावना भी ज्यादा हो सकती है। अतः यह जरूरी है कि सिफारिश की गई मात्रा में ही नाइट्रोजन का उपयोग करें और दूसरे तत्व फास्फोरस और पोटाश तथा सूक्ष्म तत्वों की भी सिफारिश की गई मात्रा सन्तुलित प्रयोग करें। धन्यवाद।



08 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के सभी किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। जलवायु परिवर्तन का बहुत हद तक सीधा सम्बन्ध उर्जा के उपयोग से चाहे हम उर्जा का उपयोग बिजली के रुप में करें, पट्रोल या डीजल के रुप में करें या ईधन, लकड़ी या कोयला के रुप में करें। बिजली बनाने में भी भारी मात्रा में कोयला या डीजल का उपयोग होता है। उर्जा के ये सभी स्त्रोत वातावरण में धुंआ छोड़ते हैं और जिसका असर वातावरण के तापमान पर पडता है और उसका मौसम और जलवायु पर असर पडता है। चाहे खेती हो या घर उर्जा का उपयोग बढता ही जा रहा है। उर्जा का उपयोग कर हमें अपने कामों में और जीवन शैली में सुविधा भी मिलती है इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन उर्जा का सही उपयोग कर हम उसके उपयोग को कम कर सकते हैं। चाहे घर में बिजली या ईधन का उपयोग हो या खेत में सड़क पर डीजल। हम अगर सावधानी और सही तरीके से इनका उपयोग करें साथ ही प्राकृतिक उर्जा के स्त्रोत जैसे सौर उर्जा और पवन उर्जा को भी बढावा दे तो हम उर्जा के उपयोग से जो पर्यावरण को नुकसान हो रहा है उसे कम कर सकते हैं। आप सोचे कि आप उर्जा के उपयोग में किस तरह कमी कर सकते हैं और उसे घर में और खेत में लागू करें। धन्यवाद।



09 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के सभी किसान भाइयों और बहनो आप सबको CCAFS का नमस्कार। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार आपके जिले में अगले तीन-चार दिन तक मौसम साफ और शुष्क रहेगा। दिन में अधिकतम तापमान 24-26 डिग्री सेल्सियस और रात में न्यूनतम तापमान 11 सेल्सियस के करीब रहने का अनुमान है। सुबह में हवा में नमी 27-43% और दोपहर में 16-24% रह सकती है। पिछवा हवा 5-9 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफतार से चलेगी। ऐसे मौसम में गेहूँ की खेती खेती में समयानुसार पहली सिंचाई दीमक से बचाव या यूरिया बिखेरने का काम पूरा करें। खेत में किसी भी तरह पोषक तत्व की कमी, बीमारी व कीट प्रकोप दिखाई दे तों तुरन्त CCAFS की हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



09 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। क्या आपने कभी सोचा है कि आप कनक/गेहूँ की ज्यादा से ज्यादा कितनी उपज ले सकते हैं या आपको उपज पाने का क्या लक्ष्य बनाना चाहिये। कुछ लोग एक एकड़ में 16 बोरी या 16 क्विंटल गेहूँ की उपज लेकर खुश है। कुछ 18 क्विंटल उपज ले रहे है। लेकिन अपने साधनों और उन्नत तकनीक का उपयोग कर आसानी से और कितनी उपज बढा सकते है। CYMMIT द्वारा तैयार किये गये Nutrient Expert कार्यक्रम के अनुसार हम फसल अवशेष और खादों का सही इस्तेमाल कर प्रति एकड़ 24 क्विंटल गेहूँ की उपज का लक्ष्य रख सकते हैं। जिन खेती के तरीकों को आप काम में ले रहें हैं उसके हिसाब से इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये कितना खाद देना है, इसका निर्णय Nutrient Expert कार्यक्रम जो गेहूँ के लिये बनाया गया है उसे अपनाना चाहिये। कुछ किसान भाइयों ने इस कार्यक्रम को अपनाकर पोषक तत्वों की लागत पर सही मुनाफा कमाया है और अधिक उपज ली है।



10 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। हमने आपको गेहूँ में कुछ सूक्ष्म तत्वों की कमी के लक्षण बताये थे। आज हम आपको बोरोन तत्व की कमी लक्षण और उससे बचाव के उपाय के बरे में जानकारी देगें। सबसे पहले तो हम यह भी कहना चाहते हैं कि कई बार सूक्ष्म तत्व की कमी के लक्षणों की सही पहचान नहीं हो पाती है क्योंकि इनके लक्षणों में फर्क बहुत कम होता है और रासायनिक खरपतवारनाशी के ज्यादा उपयोग या किसी बीमारी के कारण भी सूक्ष्म तत्वों की कमी के लक्षण साफ नहीं दिखते। ऐसे में विशेषज्ञ की राय लें। बोरोन की कमी के लक्षण उपरी पत्तों पर दिखाई देती है। पत्तों का रंग पीला पड़ जाता है और पत्ते छोटे रह जाते हैं। बोरोन की कमी से गेहूँ की बाली मे दाने नहीं बनते है और बाली खाली रह जाती है। रेतीली भूमि, अधिक पी.एच. और सूखे की स्थिति में पौधों को बोरोन की उपलब्धी घट जाती है जिससे बोरोन के उर्वरको का छिड़काव कर के पूरा किया जा सकता है। बोरोन की कमी वाले क्षेत्रों में बोरोनेटेड यानि बोरोन मिले सिंगल सुपर फास्फेट, डी.ए.पी. और एन.पी.के. उर्वरक भी उपलब्ध है। बोरोन, सोडियम बोरेट और बोरीक एसिड़ बोरोन के प्रमुख स्त्रोत है। साधारण तथा आधा से एक किलोग्राम बोरोन तत्व एक एकड़ क्षेत्र के लिये काफी है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



10 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। कुछ दिन पहले हमने आपको सलाह दी थी कि गेहूँ की खेती में खर्चे का हिसाब रखें। उम्मीद है कि आप इस सलाह को मानते हुए खर्चे का हिसाब रख रहे होगें। मजदूरी, बीज, खाद, दवा, खेत की तैयारी सिंचाई, कटाई, गहाई सभी कामों पर जो भी खर्च हो रहा है उसका हिसाब आपको लिखते रहना है। जब भी खेत में कोई काम हो उसी शाम उसका खर्च एक जगह लिखते रहना है। हमें खेती व्यापार की तरह करनी है। उसमें लाभ-हानी का हिसाब रखना है। खेती के व्यवसाय को लाभ दायक बनाने के लिये यह आवश्यक है हम उसका पूरा लेखा जोखा रखें और फिर विचार करें कि खेत से ज्यादा कमाई कैसे की जा सकती है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



11 DECEMBER

Morning :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनो को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ में शीर्ष या शिखर जड़ की अवस्था के बाद कल्ले फुटने की अवस्था आती है। कितने कल्ले बनेगें और कितनी बालियां बनेगी यह इस अवस्था पर पौधे के स्वास्थ पर निर्भर करता है। यह अवस्था तेजी से बढते पौधे के वानिस्पतिक बढवार की होती है। इस अवस्था से बालियां निकलने की अवस्था तक पौधों में पोषक तत्वों की आवश्यकता सबसे अधिक रहती है यदि इस अवस्था में आवश्यक पोषक तत्वों में से कोई भी पौधों में आवश्यक पोषक तत्वों में से कोई भी पौधों को नहीं मिला तो पौधे की बढवार रुक जाती है जिसका उपज पर बुरा प्रभाव पडता है यदि कोई तत्व पौधे को नहीं मिल पाया है या कम मिल पाया है तो पौधे पर उसकी कमी के लक्षण अवश्य दिखेगें। हर तत्व की कमी के लक्षण अलग अलग होते है। कुछ तत्वो की कमी के लक्षण पुराने पत्तों पर दिखता है तो कुछ का नये पत्तों पर। कभी पत्ते पर धारियां दिखाई देती है तो कभी धब्बेनूमा दाग या फिर पूरा पौधा ही पीला हो जाता है।पौधों की बढवार की अवस्था में सभी पोषक तत्व पौधों को जरुर मिलना चाहिये। पहले तो कमी के लक्षण पहचाने फिर उस तत्व की कमी दूर करने के लिये कदम उठाये। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



11 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाई और बहनो के लिये यह संदेश CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। उर्जा बचाने के हमारे संदेश को सुन कर हैल्पलाईन पर यह प्रश्न आया कि हम बिजली की बचत कैसे कर सकते हैं इसके तो बहुत छोटे छोटे उपाय है जो हम अपना सकते हैं। घर से ही बिजली की बचत चालू करें। पूराने बल्ब की जगह CFL बल्ब लगायें। ये दूसरे बल्बों से महंगे जरूर है लेकिन इनसे 70-75% तक बिजली बचती है। और ये दूसरे बल्बों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा समय तक चलते है। पढाई के समय table lamp का उपयोग करें जिससे कम वाल्ट के बल्ब से ही काम चल जायेगा। दिन में खुले में जहां प्रकाश है उस स्थान को काम में लें। दूसरा उपाय यह कि जितने भी बिजली के उपकरण घर में है चाहे वो TV , COMPUTER और AC ही क्यू न हो उनको बंद पर बिजली के plug के स्थान से भी बंद करें क्योंकि ये उपकरण बंद करने पर भी बिजली का उपयोग करते हैं तो इनको बिजली मिलना ही बंद करें। बिजली उपकरण को खरीदते समय उनके बिजली बचाने के लगे सितारो पर ध्यान दें। घर में यदि FRIDGE है तो उसका सही उपयोग करें। उसका दरवाजा ज्यादा देर तक खुला न रखें। उसमें कोई भी चीज रखने से पहले उसे साधारण तापमान तक ठण्डा कर लें। जब तक बहुत आवश्यकता न हो तो । AC या ROOM HEATER नहीं चलायें। ऐसी कई छोटी छोटी बातों पर ध्यान देकर न सिर्फ हम हमारा बिजली का बिल कम करगे अथवा जलवायु परिवर्तन रोकने में भी सहायक होगें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



12 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की बुवाई करके आपने धान के भण्डारण पर भी धान देना है। भण्डारण में धान की गुणवक्ता और मात्रा दोनों का नुकसान हो सकता है। यह माना गया है कि भण्डारण में ही 4 से 18 प्रतिशत धान का नुकसान हो सकता है। कीड़े, फंफूद और चूहे धान को भण्डारण में नुकसान पहुंचाते हैं। धान के भण्डारण में सबसे बड़ी बात तो यह की धान जिसका भण्डारण करना हो उसकी नमी 10-12% रखी जाय। दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जहां भण्डारण किया जा रहा है वह जगह साफ हो। उस स्थान को Melatheon से उपचारित कर लें। टीन की कोढिया का इस्तेमाल करें। Melatheon से उपचारित करे लें। Melatheon 50 ई.सी. 5 मिली लीटर दवा 20 लीटर पानी में मिलाये और भण्डारण गृह या बोरिया उपचारित करें। भण्डारण के स्थान को वायुरोधी रखें। सेलफोस से भण्डारण का प्रघुमन यानि Fumiyation भी किया जा सकता है। एक टन धान के लिये 5 सल्फास की गोलियां पर्याप्त होगी यदि कम समय के लिये भण्डारण करना हो तो कम गोलियां रखी जाती है। सही ढंग से धान का भण्डारण करें और उसे सुरक्षित रखें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



12 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की फसल की शुरुवाती अवस्था में सतही टिड्डे का प्रकोप देखा जा सकता है। यह जरुरी है कि खेत पर टिड्डे के आक्रमण पर निगरानी रखी जाय। टिड्डे दिखाई देने पर उनके नियंत्रण का उपाय करना चाहिये। टिड्डे जमीन के पास से पौधों को काटते हैं और फसल को नुकसान पहुचाते हैं। टिड्डे के नियंत्रण के लिये 10 किलोग्राम मिथाइल पैराथियान 2% धूल एक एकड़ खेत पर एक सार बिखेरे। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



13 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाई और बहनों के लिये यह सूचना CCAFS की तरफ से दी जा रही है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन चार दिन तक आपके जिले मे मौसम साफ और शुष्क रहेगा। धीरे धीरे ठण्ड बढती जा रही है और आज हवा कुछ तेज रह सकती है। दिन का अधिकतम तापमान 23-25 डिग्री सेल्सियस और रात में न्यूनतम तापमान 8-11 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। सुबह हवा में नमी 34-51% और दोपहर में 21-26% रहने का अनुमान है। आज हवा का रुख पश्चिमी रहेगा और गति 15-20 किलोमीटार प्रति घन्टे रहेगी। कल से हवा की गति कम होकर 3-8 किलोमीटर प्रति घन्टा रह सकती है। अगर आज आप खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिये स्प्रे करना चाह रहे हैं तो हवा का रुख और रफतार देख कर ही स्प्रे करें और सावधानी बरते की स्प्रे की बोछार दूसरे खेतों और फसलों पर न जायें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



13 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। इन दिनों आप गेहूँ के खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिये या जिंक और यूरिया का छिड़काव यानि स्प्रे कर सकते हैं। इसके अलावा बाद में आप किसी बिमारी या कीट नियंत्रण के लिये भी स्प्रे कर सकते हैं। जब हम खरपतवार नाशी दवा का इस्तेमाल करते हैं तो स्प्रे जमीन गिरनी चाहिये लेकिन जब हम कोई खाद जैसे यूरिया, जिंक या और किसी तत्व का स्प्रे करें तो वो पौधे पर गिरना चाहिये और जब स्प्रे किसी बिमारी या कीड़े के नियंत्रण के लिये है तो पौधे पर जहां बीमारी या कीड़ा वहां स्प्रे पहुचना चाहिये। इसके अलावा यह ध्यान रखना होगा कि स्प्रे मशीन से फुव्वारा बराबर एकसार गिरें। दवा और पानी की सही मात्रा का उपयोग करें। हवा के रुख को देखें। मौसम शांत और साफ होने पर स्प्रे करें। बहुत सुबह जब फसल के पत्तों और ओेस जमा हो तो स्प्रे न करें। स्प्रे की फुव्वार इधर उधर न फैलें। हो तो स्प्रे का इस्तेमाल से पहले धोकर काम में लें। स्प्रे करते समय मुहंपर कपड़ा बांधे और बाद में अच्छी तरफ से हाथ पांव धोये। पूरी सावधानी से स्प्रे करें, फसल को बचाये और स्वंय भी बचें। धन्यवाद।



14 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। जैसे जैसे गेहूँ की फसल में बढ़वार होती है वैसे वैसे उसकी पोषक तत्वों की आवश्यकता भी बढ़ जाती है यदि भूमि में पोषक तत्व उपलब्ध नहीं है तो उनकी कमी के लक्षण पौधे पर दिखाई देते हैं। नाइट्रोजन की कमी की दशा में पौधों की बढ़वार रुक जाती है। पौधे छोटे, पतले व कमजोर दिखाई देते हैं। पौधों पर कल्ले की संख्या भी कम हो जाती है। नाइट्रोजन की कमी के सही लक्षण सबसे पहले पौधे की पुरानी पत्तियों पर अदिखाई देते हैं। पुरानी पत्तियों के सीरे से पीला पन दिखना चालू होता है जो उपर से नीचे की ओर बढता है। नाइट्रोजन की अधिक कमी होने पर पत्तियों का रंग पीला- भूरा होने लगता है और वे सूख जाती है। नाइट्रोजन की कमी दूर करने के लिये नाइट्रोजन उर्वरक यूरिया फसल में बिखेरा जाय। खड़ी फसल में यूरिया के दो प्रतिशत घोल का छिड़काव भी किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



14 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। हमारे देश में कृषि और महिलाओ की विशेष साझेदारी रही है। सिर्फ खेती के काम ही नहीं उनसे जुड़े हुए तीज- त्योहारों में भी महिलाओ की विशेष भागीदारी दिखाई गई है। जहां परम्परागत तरीके से खेती हो रही है वहां तो खेती के काम में महिलाओ की भागीदार 50% से भी ज्यादा है। फसल की बुवाई निराई-गुड़ाई, सिंचाई, कटाई, ओसाई, भण्डारण के काम महिलाओ द्वारा किये जाते हैं। जहां खेती के काम का मशीनी करण हुआ है वहां महिलाये खेती के काम से दूर हुई है। बागवानी और पशुपालन में भी महिलाओं का पूरा योगदान है। बदलती परिस्थितियों में खास कर जलवायु परिवर्तन के काम से जुड़े पहलुओं पर और खेती को व्यवसाय बनाने की दिशा में महिलाओं की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी। पूरे परिवार को ही जलवायु परिवर्तन थामने की इस मुहीम से जोड़ना है। CCAFS के संदेश सभी सूने और उनसे लाभ उठायें। धन्यवाद।



15 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। आप अपने गेहूँ के खेत हर सवेरे जरूर देख रहे होगें। अगर गेहूँ की फसल गहरी हरे रंग की है लेकिन फिर भी पौधे पतले, छोटे और कमजोर लग रहे हैं और पुरानी पत्तियों के नोक पर बैगनी रंग प्रकट हो रहा है और नीचे की ओर बढ रहा है तो यह मानना होगा कि यह फास्फोरस तत्व की कमी के लक्षण है। ऐसे लक्षण उन जमीनों पर जहां जीवांश की मात्रा कम है और भूमि कल्चर यानि क्षारीय है या अम्लीय है। जहां सघन खेती हो रही वहां से लक्षण ज्यादा देखने को मिल सकते हैं। आमतोर पर फास्फोरस का खाद बुवाई के समय ही देने की सिफरिश करते हैं लेकिन कमी के लक्षण दिखाई देने पर खड़ी फसल में पानी में शतप्रतिशत घुलनशील अमोनियम फास्फेट का छिड़काव किया जा सकता है या सिंचाई के साथ प्रयोग किया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



15 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ की फसल में सन्तुलिय्त खाद के उपयोग का मतलब है कि हम फसल के लिये जो पोषक तत्व-नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्व दे रहे हैं उनका सही अनुपात हो। यदि अनुपात सही नहीं रहा तो सभी तत्वों से जो लाभ फसल को मिलना चाहियें वो नहीं मिलेगा। उदाहरण के तोर पर यदि सिफारिश की गई मात्रा में नाइट्रोजन तो दे दिया लेकिन फास्फोरस या पोटाश या सूक्ष्म तत्व सिफारिश की गई मात्रा से कम दिया है तो वो भी असन्तुलित उपयोग होगा। इस परिस्थिति में नाइट्रोजन की मात्रा अधिक होगी और फसल को नुकसान हो सकता है। दूसरे तत्वों पर जो पैसा खर्च किया वो भी बेकार गया और उपज भी कम हो गई। संतुलित उर्वरक उपयोग नहीं करने से खेती को दोहरा नुकसान होता है। एक तो खर्च अधिक दूसरा उपज कम साथ ही भूमि की उर्वराशक्ति का भी सन्तुलन बिगड़ा। अतः सन्तुलित खाद के उपयोग पर विशेष ध्यान दें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



16 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों को CCAFS का नमस्कार। गेहूँ में पहली सिंचाई शीर्ष या शिखर जड़े निकलते समय बुवाई के 20-25 दिन बाद देनी थी। लेकिन दूसरी कब देनी चाहिये। सामान्यतौर जब पानी की कोई कमी नहीं है और गेहूँ को कुल छ सिंचाई तक देने की सुविधा हो तो दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 20-25 दे सकते हैं। यदि पानी की कमी है कुल तीन या चार सिंचाई ही दी जा सकती है तो दूसरी सिंचाई को थोड़ा और टाला जा सकता है। ऐसे में दूसरी सिंचाई तने में गांठे बनने की अवस्था पर दी जा सकती है। दूसरी सिंचाई में थोड़ी देर करने पर उपज पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन फसल में कभी भी मुरझाहट या खेत की मिट्टी पर तड़क नहीं आनी चाहियें। बालियां निकलने की अवस्था और दाने की दुधिया अवस्था पर सिंचाई अवश्य की जानी चाहियें। ये अवस्था सिंचाई के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



16 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की फसल पर मौसम का विशेष प्रभाव होता है। यदि तापमान कम हो तो अलग प्रभाव होता है और ज्यादा हो जाय तो भी बुरा प्रभाव पड़ता है। गेहूँ की फसल के लिये सबसे उपयुक्त दिन का तापमान 15-20 डिग्री सेल्सियस है यदिन का औसत तापमान 10-12 डिग्री सेल्सिस से कम होता है तो पौधों की बढवार में रुकावट होती है यदि न्यूनतम तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से कम होता है तो बढवार एक दम रुक जाती है। यदि तापमान इससे भी कम हो जाता है तो पला पड़ने कि सम्भावना हो जाती है और फसल नस्ट हो सकती है। लम्भी अवधि तक धुंध या कुवासा होने पर भी बड़वार थम जाती है। गेहूँ की पकाव की अवस्था पर दिन का औसत तापमान 18-20 डिग्री सेल्सियस उपयुक्त रहता है लेकिन यदि दिन का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहता तो फसल में अनचाहा पकाव आ जाता है। CCAFS के संदेश लगातार सुनते रहें और मौसम की जानकारी लेते रहें। धन्यवाद।



17 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अगले तीन-चार दिनों में आपके जिलें में मौसम में कोई खास बदलाव होने वाला नहीं है। मोटे तोर पर आसमान साफ रहेगा लेकिन रात में ओर सुबह धुंध या कोहरा छा सकता है। दिन का अधिकतम तापमान 19-20 डिग्री सेल्सियस और रात का न्यूनतम तापमान 5-6 डिग्री सेल्सियस रह सकता है। सुबह के समय हवा में नमी 45-60% और दोपहर में 25-35% रह सकती है। बदलते रुख के साथ पूरवा हवा हवा 3-6 किलोमीटर प्रति घन्टे की रफतार से चलेगी। ऐसे मौसम में यदि आप खरपतवार नाशी दवा का स्प्रे कर रहे हैं तो, दोपहर के समय जब धूप निकल रही हो और हवा तेज न हो तभी स्प्रे करें। जहां सिंचाई व यूरिय खाद देने की आवश्यकता हो तो वो काम भी किये जा सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



17 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। किसी भी फसल में सिंचाई की आवश्यकता का अनुमान भूमि में नमी की जानकारी लेकर किया जाता है। वैसे तो भूमि की नमी को जानने के कई वैज्ञानिक तरीके है लेकिन एक मोटा तरीका यह भी है कि नमी का अहसाह खेत की मिट्टी को हाथ में लेकर किया जाय। रेतीली दोमट मिट्टी को यदि मुठी में लेकर उसका पिण्ड बनाया जाय और वो पिण्ड बनने के बाद एक दम बिखर जाय तो यह मानना चाहिये कि अब खेत को सिंचाई की आवश्यकता हो गई है। इससे पहले जब भूमि में पर्याप्त नमी रहेगी तो पिण्ड बिखरेगा नहीं और उसपर ऊंगली के दबाव के निशान भी रहेगें, यदि हथेली और ऊंगली पर पानी के निशान भी बने तो समझो कि अभी सिंचाई देने में देर हैं। पौधों के पत्तों की अवस्था देख कर भी सिंचाई की आवश्यकता का अनुमान लगाया जा सकता है। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



18 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाइयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। गेहूँ की फसल जब 30-35 दिन की हो जाती है तो उसमें सूक्ष्म तत्वों की कमी दिखने की सम्भावना रहती है। यदि खेत की भूमि हाल ही में समतल की गई है या उसका पी.एच. मान साढे सात से ज्यादा है तो वहां जिंक की कमी प्रायः देखने को मिलती है। रेतीली मिट्टी और फास्फोरस की अधिकता वाली भूमि में भी जिंक की कमी के लक्ष्ण दिखाई देने की सम्भावना ज्यादा होती है। गेहूँ की फसल में जिंक की कमी के लक्षण बीच की पत्तियों पर दिखाई देते हैं। शुरू की अवस्था में नई और पुरानी पत्तियों पर जिंक की कमी का कोई लक्षण नहीं दिखाई पड़ेगा। बीच की पत्तियों पर मटमैले भूरे हरे धब्बे पत्तियों के बीच में उभरते हैं जो बाद में पीले भूरे हो कर बड़े होते रहते हैं और पत्तियों का यह भाग सूख जाता है। जिंक की कमी वाले इलाको में बुवाई के समय 10 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति एकड़ हर दूसरे-तीसरे साल काम में लेना चाहिये। खड़ी फसल में 2 किलोग्राम जिंक सल्फेट और एक किलोग्राम बुझा चूना अलग से घोल बनाकर 200 लीटर पानी में मिलाये आव्र एक एकड़ फसल पर छिड़काव करें, यदि जरूरत हो तो 10-15 दिन बाद फिर एक और छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



18 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से दिया जा रहा है। सिर्फ डीजल की बढती किमतों के कारण ही नहीं बल्कि पर्यावरण की दृष्ट्री से भी हमें डीजल के उपयोग में सावधानी बरतनी है और उसके उपयोग में बचत करनी है। सबसे मुख्य बात जिस पर ध्यान देना है वो यह है कि डीजल इंजन के AIR FILTER और तेल को हमेशा समय पर बदलते रहें। ईजन शुरू करने के साथ ही उसे 30-40 सैकंड़ गर्म होने दें। एक दम ईजन की रफतार न बढायें। ईजन को एक ही रफतार पर चलाये। ईजन की हमेशा SERVICE करवायें। ट्रैक्टर चलाते समय बार बार ब्रेक न लगाये। उबड़ खाबड़ रास्तों पर ट्रैक्टर चलाने से बचे। ट्रैक्टर के टायर में हवा बराबर रखें। डीजल हमेशा सुबह के समय डलवाये। ट्रैक्टर इस तरह खड़ा करें कि जब उसे चलाना हो तो सामने की तरफ ही चलें। इन छोटी छोटी बातों का हम ध्यान रख कर डीजल उपयोग में पैसा भी बचा सकते हैं और पर्यावरण पर होने वाले नुकसान में भी कमी ला सकते हैं। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



19 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनो को CCAFS की शुभकामनाएं। आजकल हम फसलों को मोटेतौर पर सिर्फ तीन प्रमुख पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश ही दे रहे हैं। इन तत्वों को देने के लिये यूरिया, डी.ए.पी. और म्यूरेट ऑफ पोटाश खादों का इस्तेमाल करते हैं। इन खादों से मुख्य तत्व अलावा और कोई खनिज तत्व फसल को नहीं मिल पाते हैं। इन प्रमुख तत्वों के अलावा जिस मुख्य तत्व की फसल को ज्यादा मात्रा में जरूरत होती है वो है गंधक या सल्फर। सल्फर की कमी में गेहूँ के पौधे पतले, छोटे और कमजोर रह जाते हैं। बालियां भी छोटी होती हैं और फसल देर से पकती है। सल्फर की कमी के लक्षण सबसे पहले नई पत्तियों पर दिखाई देते हैं। पत्तियां पहले हरे रंग की होती हैं और बाद में पूरी पत्ती पर पीलापन आ जाता है। सल्फर की बहुत ज्यादा कमी होने पर नई पत्तियां लगभग सफेद रंग की दिखती है। गंधक की कमी दूर करने के लिये बुवाई के समय जिप्सम या सल्फर उर्वरक काम में लेना चाहिये। खड़ी फसल में गंधक काम में लेना चाहिये। खड़ी फसल में गंधक की कमी को दूर करने के लिये शत प्रतिशत पानी में घुलनशील उर्वरक अमोनियम सल्फेट, मैगनीशियम सल्फेट या पोटाशियम सल्फेट का प्रयोग करना चाहियें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



19 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS कि तरफ से दिया जा रहा है। आपने शायद यह सुना होगा कि जलवायु परिवर्तन के करण समुद्र की सतह उपर उठती जा रही है और धरती का कुछ हिस्सा जो समुद्र के किनारे है समुद्र में डूबता जा रहा है। यह अनुमान है कि बंगलादेश का कुछ हिस्सा और पूरा मालद्वीप समुद्र में डूब जायेगा। हमारे देश में भी उड़ीसा राज्य के तटीय इलाकों के गांवों की कुछ जमीन समुद्र में समा गई है। यह सब कैसे सम्भव हुआ है। धरती पर तापमान बढ रहा है और पहाड़ों से बर्फ पिघलकर नदियों के जरीये समुद्र में पहुंच रही है। धरती का तापमान बढने से समुद्र के पानी का तापमान भी बढ रहा है जो समुद्र कि सतह की ऊंचाईयां बढा रहा है और यह ऊंचा उठा पानी तटीय इलाकों को अपने अन्दर समेट रहा है। क्या आपने सोचा है कि समुद्र की सतह उपर उठने से धरती पर मानव, पशु और वनस्पति पर क्या असर होगा। जीवनयापन के लिये धरती की उपलब्धता कम हो जायेगी तो हम सबको मिल कर धरती के बढते तापमान की प्रक्रिया को रोकना होगा। हमें उन सब उपायों को काम में लेना होगा जिससे धरती का तापमान नहीं बढें। CCAFS के इन संदेशों को सुनते रहे और जलवायु परिवर्तन को रोकने में सहायक बनें। धन्यवाद।



20 DECEMBER

Morning:

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों । नमस्कार। यह संदेश आपको CCAFS की तरफ से प्रसारित किया जा रहा है। गेहूँ में अब कहीं कहीं कुछ सूक्ष्म तत्वों की कमी देखी जा रही है। आज हम लौह यानि आयरन की कमी के लक्षणों की जानकारी दे रहें है। आयरन की कमी की अवस्था में गेहूँ के पौधों में कल्लों की संख्या कम रहती है। ज्यादा कमी होने पर कल्ले बिना बाली के रह जाते है और सूख जाते हैं। आयरन की कमी से नई पत्तियों पर शिराओं के बीच का भाग हल्का हरा या पीला हो जाता है और पत्तियों पर पीली धारियां दिखाई देती है। धीरे धीरे उपरी पत्तियां पूरी पीली हो जाती है। अधिक चूने युक्त या अम्लीय भूमि में आयरन की कमी के लक्षण आने की ज्यादा सम्भावना रहती है। आयरन की कमी वाले क्षेत्रों में 10 किलोग्राम फैरस सल्फेट प्रति एकड़ के हिसाब से बुआई के समय देना चाहियें। खड़ी फसल में आयरन की कमी के लक्षण दिखाई देने पर एक किलोग्राम फेरस सल्फेट को 200 लीटर पानी में घोल कर एक एकड़ क्षेत्र पर छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिये CCAFS हैल्पलाईन 9992220655 पर सम्पर्क करें। धन्यवाद।



20 DECEMBER

Evening :

करनाल जिले के क्लाईमेट स्मार्ट गाँव के किसान भाईयों और बहनों। आप सभी को CCAFS का नमस्कार। हमने यह जाना है कि जलवायु परिवर्तन में ऊर्जा के बढते उपयोग का महत्वपूर्ण योगदान है। चाहे खेत खलिहान हो या घर, ऊर्जा का उपयोग कर करना है। डीजल और बिजली की बचत कैसे की जाती है उसकी जानकारी हमने आप को दी थी। हमारे रसोई घरो में खाना पकाने में भी ऊर्जा का अधिक उपयोग होता है। कुछ छोटी छोटी बातों पर ध्यान देकर हम ईधन की काफी बचत कर सकते हैं। जहां तक सम्भव हो दाल, दलिया और सब्जियां Pressure cooker में या बर्तन में ढक कर बनाये। दाल पकाने से पहले उसे कुछ घन्टे पानी में गलाकर रखने से वो कम समय में कम ऊर्जा के साथ पक जायेगी। सब्जी के बहुत बड़े टुकड़े न पकाये, उन्हे पकने में समय लगेगा और ज्यादा ईधन खर्च होगा। पकाने में अनुपात से ज्यादा पानी काम में न लें। चुल्हा जलाने से पहले सब्जी काटने, आटा बनाने और मसाला इक्ठा रखने की पूरी तैयारी कर लें जिससे कि चुल्हा बेकार न जलें। लकड़ी जलाने का चुल्हा काम में ले रहें हैं तो, धुंआ रहित दो सुराग वाला चुल्हा काम में लें। गीली लकड़ी काम में न लें। सौर चुल्हे की मदद से ऊर्जा की बचत की जा सकती है। इन उपायों को काम में लेगें तो ईधन पर होने वाले खर्चे में भी बचत होगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है। धन्यवाद।


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